श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.24.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

एतन्मम मतं तात क्रियतां यदि रोचते।

अयं गोब्राह्मणाद्रीणां मह्यं च दयितो मखः॥ ३०

etanmama mataṃ tāta kriyatāṃ yadi rocate|

ayaṃ gobrāhmaṇādrīṇāṃ mahyaṃ ca dayito makhaḥ|| 30

अर्थ

पिताजी! मेरी तो ऐसी ही सम्मति है। यदि आपलोगोंको रुचे तो ऐसा ही कीजिये। ऐसा यज्ञ गौ, ब्राह्मण और गिरिराजको तो प्रिय होगा ही; मुझे भी बहुत प्रिय है॥ ३०॥✎ 1667

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1667 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: आप-लोगोंको → आपलोगोंको

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