yathā vidhāya te gopāḥ sahakṛṣṇā vrajaṃ yayuḥ|| 38
अर्थ
इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्णकी प्रेरणासे नन्दबाबा आदि बड़े-बूढ़े गोपोंने गिरिराज, गौ और ब्राह्मणोंका विधिपूर्वक पूजन किया तथा फिर श्रीकृष्णके साथ सब व्रजमें लौट आये॥ ३८॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे पूर्वार्धे २ चतुर्विंशोऽध्यायः॥ २४॥
इत्यद्रिगोद्विजमखं वासुदेवप्रणोदिताः।
यथा विधाय ते गोपाः सहकृष्णा व्रजं ययुः॥ ३८
इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्णकी प्रेरणासे नन्दबाबा आदि बड़े-बूढ़े गोपोंने गिरिराज, गौ और ब्राह्मणोंका विधिपूर्वक पूजन किया तथा फिर श्रीकृष्णके साथ सब व्रजमें लौट आये॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.24.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 293) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/24/38/