श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.24.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

नन्द १ उवाच

पर्जन्यो भगवानिन्द्रो मेघास्तस्यात्ममूर्तयः।

तेऽभिवर्षन्ति भूतानां प्रीणनं जीवनं पयः॥ ८

parjanyo bhagavānindro meghāstasyātmamūrtayaḥ|

te'bhivarṣanti bhūtānāṃ prīṇanaṃ jīvanaṃ payaḥ|| 8

अर्थ

नन्दबाबाने कहा—बेटा! भगवान् इन्द्र वर्षा करनेवाले मेघोंके स्वामी हैं। ये मेघ उन्हींके अपने रूप हैं। वे समस्त प्राणियोंको तृप्त करनेवाला एवं जीवनदान करनेवाला जल बरसाते हैं॥ ८॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    नन्दगोप उवाच।

    (मुद्रित पृष्ठ 290)

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