श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.24.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

तं तात वयमन्ये च वार्मुचां पतिमीश्‍वरम्।

द्रव्यैस्तद्रेतसा सिद्धैर्यजन्ते क्रतुभिर्नराः॥ ९

taṃ tāta vayamanye ca vārmucāṃ patimīśvaram|

dravyaistadretasā siddhairyajante kratubhirnarāḥ|| 9

अर्थ

मेरे प्यारे पुत्र! हम और दूसरे लोग भी उन्हीं मेघपति भगवान् इन्द्रकी यज्ञोंके द्वारा पूजा किया करते हैं। जिन सामग्रियोंसे यज्ञ होता है, वे भी उनके बरसाये हुए शक्तिशाली जलसे ही उत्पन्‍न होती हैं॥ ९॥

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