भगवान्ने देखा कि वर्षा और ओलोंकी मारसे पीड़ित होकर सब बेहोश हो रहे हैं। वे समझ गये कि यह सारी करतूत इन्द्रकी है। उन्होंने ही क्रोधवश ऐसा किया है॥ १४॥✎ 20812082
शिलावर्षनिपातेन हन्यमानमचेतनम्।
निरीक्ष्य भगवान् मेने कुपितेन्द्रकृतं हरिः॥ १४
भगवान्ने देखा कि वर्षा और ओलोंकी मारसे पीड़ित होकर सब बेहोश हो रहे हैं। वे समझ गये कि यह सारी करतूत इन्द्रकी है। उन्होंने ही क्रोधवश ऐसा किया है॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 295) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/25/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)