॥ श्रीहरिः ॥
अथाह भगवान् गोपान् हेऽम्ब तात व्रजौकसः।
यथोपजोषं विशत गिरिगर्तं सगोधनाः॥ २०
athāha bhagavān gopān he'mba tāta vrajaukasaḥ|
yathopajoṣaṃ viśata girigartaṃ sagodhanāḥ|| 20
अर्थ
इसके बाद भगवान्ने गोपोंसे कहा—‘माताजी, पिताजी और व्रजवासियो! तुमलोग अपनी गौओं और सब सामग्रियोंके साथ इस पर्वतके गड्ढेमें आकर आरामसे बैठ जाओ॥ २०॥
अथाह भगवान् गोपान् हेऽम्ब तात व्रजौकसः।
यथोपजोषं विशत गिरिगर्तं सगोधनाः॥ २०
इसके बाद भगवान्ने गोपोंसे कहा—‘माताजी, पिताजी और व्रजवासियो! तुमलोग अपनी गौओं और सब सामग्रियोंके साथ इस पर्वतके गड्ढेमें आकर आरामसे बैठ जाओ॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 296) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/25/20/