परीक्षित्! भगवान् इस प्रकार आज्ञा दे ही रहे थे कि मनस्विनी कामधेनुने अपनी सन्तानोंके साथ गोपवेषधारी परमेश्वर श्रीकृष्णकी वन्दना की और उनको सम्बोधित करके कहा—॥ १८॥
अथाह सुरभिः कृष्णमभिवन्द्य मनस्विनी।
स्वसन्तानैरुपामन्त्र्य गोपरूपिणमीश्वरम्॥ १८
परीक्षित्! भगवान् इस प्रकार आज्ञा दे ही रहे थे कि मनस्विनी कामधेनुने अपनी सन्तानोंके साथ गोपवेषधारी परमेश्वर श्रीकृष्णकी वन्दना की और उनको सम्बोधित करके कहा—॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.27.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 303) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/27/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)