श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.27.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

सुरभिरुवाच

कृष्ण कृष्ण महायोगिन् विश्‍वात्मन् विश्‍वसम्भव।

भवता लोकनाथेन सनाथा वयमच्युत॥ १९

kṛṣṇa kṛṣṇa mahāyogin viśvātman viśvasambhava|

bhavatā lokanāthena sanāthā vayamacyuta|| 19

अर्थ

कामधेनुने कहा—सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! आप महायोगी—योगेश्‍वर हैं। आप स्वयं विश्‍व हैं, विश्‍वके परमकारण हैं, अच्युत हैं। सम्पूर्ण विश्‍वके स्वामी आपको अपने रक्षकके रूपमें प्राप्तकर हम सनाथ हो गयी॥ १९॥

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