नन्दबाबाको यह मालूम नहीं था कि यह असुरोंकी वेला है, इसलिये वे रातके समय ही यमुनाजलमें घुस गये। उस समय वरुणके सेवक एक असुरने उन्हें पकड़ लिया और वह अपने स्वामीके पास ले गया॥ २॥✎ 886
तं गृहीत्वानयद् भृत्यो वरुणस्यासुरोऽन्तिकम्।
अविज्ञायासुरीं वेलां प्रविष्टमुदकं निशि॥ २
नन्दबाबाको यह मालूम नहीं था कि यह असुरोंकी वेला है, इसलिये वे रातके समय ही यमुनाजलमें घुस गये। उस समय वरुणके सेवक एक असुरने उन्हें पकड़ लिया और वह अपने स्वामीके पास ले गया॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.28.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 304) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/28/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)