नन्दबाबाके खो जानेसे व्रजके सारे गोप ‘श्रीकृष्ण! अब तुम्हीं अपने पिताको ला सकते हो; बलराम! अब तुम्हारा ही भरोसा है’—इस प्रकार कहते हुए रोने-पीटने लगे। भगवान् श्रीकृष्ण सर्वशक्तिमान् हैं एवं सदासे ही अपने भक्तोंका भय भगाते आये हैं। जब उन्होंने व्रजवासियोंका रोना-पीटना सुना और यह जाना कि पिताजीको वरुणका कोई सेवक ले गया है, तब वे वरुणजीके पास गये॥ ३॥✎ 886
चुक्रुशुस्तमपश्यन्तः कृष्ण रामेति गोपकाः।
भगवांस्तदुपश्रुत्य पितरं वरुणाहृतम्।
तदन्तिकं गतो राजन् स्वानामभयदो विभुः॥ ३
नन्दबाबाके खो जानेसे व्रजके सारे गोप ‘श्रीकृष्ण! अब तुम्हीं अपने पिताको ला सकते हो; बलराम! अब तुम्हारा ही भरोसा है’—इस प्रकार कहते हुए रोने-पीटने लगे। भगवान् श्रीकृष्ण सर्वशक्तिमान् हैं एवं सदासे ही अपने भक्तोंका भय भगाते आये हैं। जब उन्होंने व्रजवासियोंका रोना-पीटना सुना और यह जाना कि पिताजीको वरुणका कोई सेवक ले गया है, तब वे वरुणजीके पास गये॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.28.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 305) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/28/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)