श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण ब्रह्मा आदि ईश्वरोंके भी ईश्वर हैं। लोकपाल वरुणने इस प्रकार उनकी स्तुति करके उन्हें प्रसन्न किया। इसके बाद भगवान् अपने पिता नन्दजीको लेकर व्रजमें चले आये और व्रजवासी भाई-बन्धुओंको आनन्दित किया॥ ९॥
एवं प्रसादितः कृष्णो भगवानीश्वरेश्वरः।
आदायागात् स्वपितरं बन्धूनां चावहन् मुदम्॥ ९
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण ब्रह्मा आदि ईश्वरोंके भी ईश्वर हैं। लोकपाल वरुणने इस प्रकार उनकी स्तुति करके उन्हें प्रसन्न किया। इसके बाद भगवान् अपने पिता नन्दजीको लेकर व्रजमें चले आये और व्रजवासी भाई-बन्धुओंको आनन्दित किया॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.28.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 305) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/28/9/