गोविन्द! मैं जानता हूँ कि आप अपने पिताके प्रति बड़ा प्रेमभाव रखते हैं। ये आपके पिता हैं। इन्हें आप ले जाइये। परन्तु भगवन्! आप सबके अन्तर्यामी, सबके साक्षी हैं। इसलिये विश्वविमोहन श्रीकृष्ण! आप मुझ दासपर भी कृपा कीजिये॥ ८॥
ममाप्यनुग्रहं कृष्ण कर्तुमर्हस्यशेषदृक्।
गोविन्द नीयतामेष पिता ते पितृवत्सल॥ ८
गोविन्द! मैं जानता हूँ कि आप अपने पिताके प्रति बड़ा प्रेमभाव रखते हैं। ये आपके पिता हैं। इन्हें आप ले जाइये। परन्तु भगवन्! आप सबके अन्तर्यामी, सबके साक्षी हैं। इसलिये विश्वविमोहन श्रीकृष्ण! आप मुझ दासपर भी कृपा कीजिये॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.28.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 305) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/28/8/