श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.29.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

परिवेषयन्त्यस्तद्धित्वा पाययन्त्यः शिशून् पयः।

शुश्रूषन्त्यः पतीन् काश्‍चिदश्‍नन्त्योऽपास्य भोजनम्॥ ६

pariveṣayantyastaddhitvā pāyayantyaḥ śiśūn payaḥ|

śuśrūṣantyaḥ patīn kāścidaśnantyo'pāsya bhojanam|| 6

अर्थ

जो भोजन परस रही थीं वे परसना छोड़कर, जो छोटे-छोटे बच्चोंको दूध पिला रही थीं वे दूध पिलाना छोड़कर, जो पतियोंकी सेवा-शुश्रूषा कर रही थीं वे सेवा-शुश्रूषा छोड़कर और जो स्वयं भोजन कर रही थीं वे भोजन करना छोड़कर अपने कृष्णप्यारेके पास चल पड़ीं॥ ६॥

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