श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.3.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

वसुदेव उवाच

विदितोऽसि भवान् साक्षात् पुरुषः प्रकृतेः परः।

केवलानुभवानन्दस्वरूपः सर्वबुद्धिदृक्॥ १३

vidito'si bhavān sākṣāt puruṣaḥ prakṛteḥ paraḥ|

kevalānubhavānandasvarūpaḥ sarvabuddhidṛk|| 13

अर्थ

वसुदेवजीने कहा—मैं समझ गया कि आप प्रकृतिसे अतीत साक्षात् पुरुषोत्तम हैं। आपका स्वरूप है केवल अनुभव और केवल आनन्द। आप समस्त बुद्धियोंके एकमात्र साक्षी हैं॥ १३॥

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