श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.3.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

वर्षवातातपहिमघर्मकालगुणाननु ।

सहमानौ श्‍वासरोधविनिर्धूतमनोमलौ॥ ३४

varṣavātātapahimagharmakālaguṇānanu |

sahamānau śvāsarodhavinirdhūtamanomalau|| 34

अर्थ

तुम दोनोंने वर्षा, वायु, घाम, शीत, उष्ण आदि कालके विभिन्‍न गुणोंका सहन किया और प्राणायामके द्वारा अपने मनके मल धो डाले॥ ३४॥

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