श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.3.44

दशम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

एतद् वां दर्शितं रूपं प्राग्जन्मस्मरणाय मे।

नान्यथा मद्भवं ज्ञानं मर्त्यलिंगेन जायते॥ ४४

etad vāṃ darśitaṃ rūpaṃ prāgjanmasmaraṇāya me|

nānyathā madbhavaṃ jñānaṃ martyaliṃgena jāyate|| 44

अर्थ

मैंने तुम्हें अपना यह रूप इसलिये दिखला दिया है कि तुम्हें मेरे पूर्व अवतारोंका स्मरण हो जाय। यदि मैं ऐसा नहीं करता, तो केवल मनुष्य-शरीरसे मेरे अवतारकी पहचान नहीं हो पाती॥ ४४॥

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