श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.30.15

दशम स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

कस्याश्‍चित् पूतनायन्त्याः कृष्णायन्त्यपिबत् स्तनम्।

तोकायित्वा रुदत्यन्या पदाहञ्छकटायतीम्॥ १५

kasyāścit pūtanāyantyāḥ kṛṣṇāyantyapibat stanam|

tokāyitvā rudatyanyā padāhañchakaṭāyatīm|| 15

अर्थ

एक पूतना बन गयी, तो दूसरी श्रीकृष्ण बनकर उसका स्तन पीने लगीं। कोई छकड़ा बन गयी, तो किसीने बालकृष्ण बनकर रोते हुए उसे पैरकी ठोकर मारकर उलट दिया॥ १५॥✎ 1431

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1431 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): लगी। → लगीं।

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