श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.33.32

दशम स्कन्ध · अध्याय 33 · अथ त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः

ईश्‍वराणां वचः सत्यं तथैवाचरितं क्‍वचित्।

तेषां यत् स्ववचोयुक्तं बुद्धिमांस्तत् समाचरेत्॥ ३२

īśvarāṇāṃ vacaḥ satyaṃ tathaivācaritaṃ kvacit|

teṣāṃ yat svavacoyuktaṃ buddhimāṃstat samācaret|| 32

अर्थ

इसलिये इस प्रकारके जो शंकर आदि ईश्‍वर हैं, अपने अधिकारके अनुसार उनके वचनको ही सत्य मानना और उसीके अनुसार आचरण करना चाहिये। उनके आचरणका अनुकरण तो कहीं-कहीं ही किया जाता है। इसलिये बुद्धिमान् पुरुषको चाहिये कि उनका जो आचरण उनके उपदेशके अनुकूल हो, उसीको जीवनमें उतारे॥ ३२॥

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