॥ श्रीहरिः ॥
ततो दुन्दुभयो नेदुर्निपेतुः पुष्पवृष्टयः।
जगुर्गन्धर्वपतयः सस्त्रीकास्तद्यशोऽमलम्॥ ५
tato dundubhayo nedurnipetuḥ puṣpavṛṣṭayaḥ|
jagurgandharvapatayaḥ sastrīkāstadyaśo'malam|| 5
अर्थ
स्वर्गकी दिव्य दुन्दुभियाँ अपने-आप बज उठीं। स्वर्गीय पुष्पोंकी वर्षा होने लगी। गन्धर्वगण अपनी-अपनी पत्नियोंके साथ भगवान्के निर्मल यशका गान करने लगे॥ ५॥✎ 2090
ततो दुन्दुभयो नेदुर्निपेतुः पुष्पवृष्टयः।
जगुर्गन्धर्वपतयः सस्त्रीकास्तद्यशोऽमलम्॥ ५
स्वर्गकी दिव्य दुन्दुभियाँ अपने-आप बज उठीं। स्वर्गीय पुष्पोंकी वर्षा होने लगी। गन्धर्वगण अपनी-अपनी पत्नियोंके साथ भगवान्के निर्मल यशका गान करने लगे॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.33.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 332) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/33/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #2090 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डे़ → ड़े