भगवान्के इस प्रकार ठेल देनेपर वह फिर तुरंत ही उठ खड़ा हुआ और क्रोधसे अचेत होकर लंबी-लंबी साँस छोड़ता हुआ फिर उनपर झपटा। उस समय उसका सारा शरीर पसीनेसे लथपथ हो रहा था॥ १२॥
सोऽपविद्धो भगवता पुनरुत्थाय सत्वरः।
आपतत् स्विन्नसर्वांगो निःश्वसन् क्रोधमूर्छितः॥ १२
भगवान्के इस प्रकार ठेल देनेपर वह फिर तुरंत ही उठ खड़ा हुआ और क्रोधसे अचेत होकर लंबी-लंबी साँस छोड़ता हुआ फिर उनपर झपटा। उस समय उसका सारा शरीर पसीनेसे लथपथ हो रहा था॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.36.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 358) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/36/12/