श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.36.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 36 · अथ षट्त्रिंशोऽध्यायः

सोऽपविद्धो भगवता पुनरुत्थाय सत्वरः।

आपतत् स्विन्‍नसर्वांगो निःश्‍वसन् क्रोधमूर्छितः॥ १२

so'paviddho bhagavatā punarutthāya satvaraḥ|

āpatat svinnasarvāṃgo niḥśvasan krodhamūrchitaḥ|| 12

अर्थ

भगवान्‌के इस प्रकार ठेल देनेपर वह फिर तुरंत ही उठ खड़ा हुआ और क्रोधसे अचेत होकर लंबी-लंबी साँस छोड़ता हुआ फिर उनपर झपटा। उस समय उसका सारा शरीर पसीनेसे लथपथ हो रहा था॥ १२॥

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