॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.36.13
तमापतन्तं स निगृह्य शृङ्गयोः
पदा समाक्रम्य निपात्य भूतले।
निष्पीडयामास यथाऽऽर्द्रमम्बरं
कृत्त्वा विषाणेन जघान सोऽपतत्॥ १३
tamāpatantaṃ sa nigṛhya śṛṅgayoḥ
padā samākramya nipātya bhūtale|
niṣpīḍayāmāsa yathā''rdramambaraṃ
kṛttvā viṣāṇena jaghāna so'patat|| 13
अर्थ
भगवान्ने जब देखा कि वह अब मुझपर प्रहार करना ही चाहता है, तब उन्होंने उसके सींग पकड़ लिये और उसे लात मारकर जमीनपर गिरा दिया और फिर पैरोंसे दबाकर इस प्रकार उसका कचूमर निकाला, जैसे कोई गीला कपड़ा निचोड़ रहा हो। इसके बाद उसीका सींग उखाड़कर उसको खूब पीटा, जिससे वह पड़ा ही रह गया॥ १३॥