अतः जब वे यहाँ आवें, तब तुमलोग उन्हें कुश्ती लड़ने-लड़ानेके बहाने मार डालना। अब तुमलोग भाँति-भाँतिके मंच बनाओ और उन्हें अखाड़ेके चारों ओर गोल-गोल सजा दो। उनपर बैठकर नगरवासी और देशकी दूसरी प्रजा इस स्वच्छन्द दंगलको देखें॥ २४॥
भवद्भ्यामिह सम्प्राप्तौ हन्येतां मल्ललीलया।
मंचाः क्रियन्तां विविधा मल्लरङ्गपरिश्रिताः।
पौरा जानपदाः सर्वे पश्यन्तु स्वैरसंयुगम्॥ २४
अतः जब वे यहाँ आवें, तब तुमलोग उन्हें कुश्ती लड़ने-लड़ानेके बहाने मार डालना। अब तुमलोग भाँति-भाँतिके मंच बनाओ और उन्हें अखाड़ेके चारों ओर गोल-गोल सजा दो। उनपर बैठकर नगरवासी और देशकी दूसरी प्रजा इस स्वच्छन्द दंगलको देखें॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.36.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 359) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/36/24/