इसी चतुर्दशीको विधिपूर्वक धनुषयज्ञ प्रारम्भ कर दो और उसकी सफलताके लिये वरदानी भूतनाथ भैरवको बहुत-से पवित्र पशुओंकी बलि चढ़ाओ॥ २६॥
आरभ्यतां धनुर्यागश्चतुर्दश्यां यथाविधि।
विशसन्तु पशून् मेध्यान् भूतराजाय मीढुषे॥ २६
इसी चतुर्दशीको विधिपूर्वक धनुषयज्ञ प्रारम्भ कर दो और उसकी सफलताके लिये वरदानी भूतनाथ भैरवको बहुत-से पवित्र पशुओंकी बलि चढ़ाओ॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.36.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 359) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/36/26/