yadi muktau tato mallairghātaye vaidyutopamaiḥ|| 32
अर्थ
यहाँ आनेपर मैं उन्हें अपने कालके समान कुवलयापीड हाथीसे मरवा डालूँगा। यदि वे कदाचित् उस हाथीसे बच गये, तो मैं अपने वज्रके समान मजबूत और फुर्तीले पहलवान मुष्टिक-चाणूर आदिसे उन्हें मरवा डालूँगा॥ ३२॥
घातयिष्य इहानीतौ कालकल्पेन हस्तिना।
यदि मुक्तौ ततो मल्लैर्घातये वैद्युतोपमैः॥ ३२
यहाँ आनेपर मैं उन्हें अपने कालके समान कुवलयापीड हाथीसे मरवा डालूँगा। यदि वे कदाचित् उस हाथीसे बच गये, तो मैं अपने वज्रके समान मजबूत और फुर्तीले पहलवान मुष्टिक-चाणूर आदिसे उन्हें मरवा डालूँगा॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.36.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 360) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/36/32/