उनके मारे जानेपर वसुदेव आदि वृष्णि, भोज और दशार्हवंशी उनके भाई-बन्धु शोकाकुल हो जायँगे। फिर उन्हें मैं अपने हाथों मार डालूँगा॥ ३३॥
तयोर्निहतयोस्तप्तान् वसुदेवपुरोगमान्।
तद्बन्धून् निहनिष्यामि वृष्णिभोजदशार्हकान्॥ ३३
उनके मारे जानेपर वसुदेव आदि वृष्णि, भोज और दशार्हवंशी उनके भाई-बन्धु शोकाकुल हो जायँगे। फिर उन्हें मैं अपने हाथों मार डालूँगा॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.36.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 360) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/36/33/