‘सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! आपका स्वरूप मन और वाणीका विषय नहीं है। आप योगेश्वर हैं। सारे जगत्का नियन्त्रण आप ही करते हैं। आप सबके हृदयमें निवास करते हैं और सब-के-सब आपके हृदयमें निवास करते हैं। आप भक्तोंके एकमात्र वांछनीय, यदुवंशशिरोमणि और हमारे स्वामी हैं॥ ११॥✎ 192120932094
कृष्ण कृष्णाप्रमेयात्मन् योगेश जगदीश्वर।
वासुदेवाखिलावास सात्वतां प्रवर प्रभो॥ ११
‘सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! आपका स्वरूप मन और वाणीका विषय नहीं है। आप योगेश्वर हैं। सारे जगत्का नियन्त्रण आप ही करते हैं। आप सबके हृदयमें निवास करते हैं और सब-के-सब आपके हृदयमें निवास करते हैं। आप भक्तोंके एकमात्र वांछनीय, यदुवंशशिरोमणि और हमारे स्वामी हैं॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.37.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 363) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/37/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#1921 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): यदुवंश-शिरोमणि → यदुवंशशिरोमणि