शरणागतवत्सल भगवान् श्रीकृष्ण उनके मनका भाव जान गये। उन्होंने बड़ी प्रसन्नतासे चक्रांकित हाथोंके द्वारा उन्हें खींचकर उठाया और हृदयसे लगा लिया॥ ३६॥
भगवांस्तमभिप्रेत्य रथांगाङ्कितपाणिना।
परिरेभेऽभ्युपाकृष्य प्रीतः प्रणतवत्सलः॥ ३६
शरणागतवत्सल भगवान् श्रीकृष्ण उनके मनका भाव जान गये। उन्होंने बड़ी प्रसन्नतासे चक्रांकित हाथोंके द्वारा उन्हें खींचकर उठाया और हृदयसे लगा लिया॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.38.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 372) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/38/36/