श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.38.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 38 · अथाष्टात्रिंशोऽध्यायः

निवेद्य गां चातिथये संवाह्य श्रान्तमादृतः।

अन्‍नं बहुगुणं मेध्यं श्रद्धयोपाहरद् विभुः॥ ३९

nivedya gāṃ cātithaye saṃvāhya śrāntamādṛtaḥ|

annaṃ bahuguṇaṃ medhyaṃ śraddhayopāharad vibhuḥ|| 39

अर्थ

इसके बाद भगवान्‌ने अतिथि अक्रूरजीको एक गाय दी और पैर दबाकर उनकी थकावट दूर की तथा बड़े आदर एवं श्रद्धासे उन्हें पवित्र और अनेक गुणोंसे युक्त अन्‍नका भोजन कराया॥ ३९॥

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