परीक्षित्! इधर भगवान् श्रीकृष्ण भी बलरामजी और अक्रूरजीके साथ वायुके समान वेगवाले रथपर सवार होकर पापनाशिनी यमुनाजीके किनारे जा पहुँचे॥ ३८॥✎ 14331434
भगवानपि सम्प्राप्तो रामाक्रूरयुतो नृप।
रथेन वायुवेगेन कालिन्दीमघनाशिनीम्॥ ३८
परीक्षित्! इधर भगवान् श्रीकृष्ण भी बलरामजी और अक्रूरजीके साथ वायुके समान वेगवाले रथपर सवार होकर पापनाशिनी यमुनाजीके किनारे जा पहुँचे॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.39.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 378) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/39/38/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1433 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ब्रह्महृद) → ब्रह्मह्रद)