श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.39.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 39 · अथैकोनचत्वारिंशोऽध्यायः

भगवानपि सम्प्राप्तो रामाक्रूरयुतो नृप।

रथेन वायुवेगेन कालिन्दीमघनाशिनीम्॥ ३८

bhagavānapi samprāpto rāmākrūrayuto nṛpa|

rathena vāyuvegena kālindīmaghanāśinīm|| 38

अर्थ

परीक्षित्! इधर भगवान् श्रीकृष्ण भी बलरामजी और अक्रूरजीके साथ वायुके समान वेगवाले रथपर सवार होकर पापनाशिनी यमुनाजीके किनारे जा पहुँचे॥ ३८॥✎ 1433 1434

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1433 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ब्रह्महृद) → ब्रह्मह्रद)
  • #1434 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मरकत-मणिके → मरकतमणिके

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