श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.39.46

दशम स्कन्ध · अध्याय 39 · अथैकोनचत्वारिंशोऽध्यायः

तस्योत्संगे घनश्यामं पीतकौशेयवाससम्।

पुरुषं चतुर्भुजं शान्तं पद्मपत्रारुणेक्षणम्॥ ४६

tasyotsaṃge ghanaśyāmaṃ pītakauśeyavāsasam|

puruṣaṃ caturbhujaṃ śāntaṃ padmapatrāruṇekṣaṇam|| 46

अर्थ

अक्रूरजीने देखा कि शेषजीकी गोदमें श्याम मेघके समान घनश्याम विराजमान हो रहे हैं। वे रेशमी पीताम्बर पहने हुए हैं। बड़ी ही शान्त चतुर्भुज मूर्ति है और कमलके रक्तदलके समान रतनारे नेत्र हैं॥ ४६॥✎ 1433 1434

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1433 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ब्रह्महृद) → ब्रह्मह्रद)
  • #1434 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मरकत-मणिके → मरकतमणिके

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