कंसके हाथसे छूटकर योगमायाका आकाशमें जाकर भविष्यवाणी करना
श्रीशुक उवाच
बहिरन्तःपुरद्वारः सर्वाः पूर्ववदावृताः।
ततो बालध्वनिं श्रुत्वा गृहपालाः समुत्थिताः॥ १
bahirantaḥpuradvāraḥ sarvāḥ pūrvavadāvṛtāḥ|
tato bāladhvaniṃ śrutvā gṛhapālāḥ samutthitāḥ|| 1
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब वसुदेवजी लौट आये, तब नगरके बाहरी और भीतरी सब दरवाजे अपने-आप ही पहलेकी तरह बंद हो गये। इसके बाद नवजात शिशुके रोनेकी ध्वनि सुनकर द्वारपालोंकी नींद टूटी॥ १॥
बहिरन्तःपुरद्वारः सर्वाः पूर्ववदावृताः।
ततो बालध्वनिं श्रुत्वा गृहपालाः समुत्थिताः॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब वसुदेवजी लौट आये, तब नगरके बाहरी और भीतरी सब दरवाजे अपने-आप ही पहलेकी तरह बंद हो गये। इसके बाद नवजात शिशुके रोनेकी ध्वनि सुनकर द्वारपालोंकी नींद टूटी॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.4.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 145) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/4/1/