इसके बाद उसने योगमायाके वचनोंपर विश्वास करके देवकी और वसुदेवको कैदसे छोड़ दिया और वह तरह-तरहसे उनके प्रति अपना प्रेम प्रकट करने लगा॥ २४॥
मोचयामास निगडाद् विश्रब्धः कन्यकागिरा।
देवकीं वसुदेवं च दर्शयन्नात्मसौहृदम्॥ २४
इसके बाद उसने योगमायाके वचनोंपर विश्वास करके देवकी और वसुदेवको कैदसे छोड़ दिया और वह तरह-तरहसे उनके प्रति अपना प्रेम प्रकट करने लगा॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.4.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 148) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/4/24/