॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.4.31
एवं चेत्तर्हि भोजेन्द्र पुरग्रामव्रजादिषु।
अनिर्दशान् निर्दशांश्च हनिष्यामोऽद्य वै शिशून्॥ ३१
evaṃ cettarhi bhojendra puragrāmavrajādiṣu|
anirdaśān nirdaśāṃśca haniṣyāmo'dya vai śiśūn|| 31
अर्थ
‘भोजराज! यदि ऐसी बात है तो हम आज ही बड़े-बड़े नगरोंमें, छोटे-छोटे गाँवोंमें, अहीरोंकी बस्तियोंमें और दूसरे स्थानोंमें जितने बच्चे हुए हैं, वे चाहे दस दिनसे अधिकके हों या कमके, सबको आज ही मार डालेंगे॥ ३१॥