॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.40.11
सत्त्वं रजस्तम इति भवतः प्रकृतेर्गुणाः।
तेषु हि प्राकृताः प्रोता आब्रह्मस्थावरादयः॥ ११
sattvaṃ rajastama iti bhavataḥ prakṛterguṇāḥ|
teṣu hi prākṛtāḥ protā ābrahmasthāvarādayaḥ|| 11
अर्थ
प्रभो! आपकी प्रकृतिके तीन गुण हैं—सत्त्व, रज और तम। ब्रह्मासे लेकर स्थावरपर्यन्त सम्पूर्ण चराचर जीव प्राकृत हैं और जैसे वस्त्र सूत्रोंसे ओतप्रोत रहते हैं, वैसे ही ये सब प्रकृतिके उन गुणोंसे ही ओतप्रोत हैं॥ ११॥