श्रीभगवान्ने कहा—चाचाजी! मैं दाऊ भैयाके साथ आपके घर आऊँगा और पहले इस यदुवंशियोंके द्रोही कंसको मारकर तब अपने सभी सुहृद्-स्वजनोंका प्रिय करूँगा॥ १७॥
आयास्ये भवतो गेहमहमार्यसमन्वितः।
यदुचक्रद्रुहं हत्वा वितरिष्ये सुहृत्प्रियम्॥ १७
श्रीभगवान्ने कहा—चाचाजी! मैं दाऊ भैयाके साथ आपके घर आऊँगा और पहले इस यदुवंशियोंके द्रोही कंसको मारकर तब अपने सभी सुहृद्-स्वजनोंका प्रिय करूँगा॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.41.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 387) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/41/17/