॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.41.23
आपूर्णकुम्भैर्दधिचन्दनोक्षितैः
प्रसूनदीपावलिभिः सपल्लवैः ।
सवृन्दरम्भाक्रमुकैः सकेतुभिः
स्वलंकृतद्वारगृहां सपट्टिकैः॥ २३
āpūrṇakumbhairdadhicandanokṣitaiḥ
prasūnadīpāvalibhiḥ sapallavaiḥ |
savṛndarambhākramukaiḥ saketubhiḥ
svalaṃkṛtadvāragṛhāṃ sapaṭṭikaiḥ|| 23
अर्थ
घरोंके दरवाजोंपर दही और चन्दन आदिसे चर्चित जलसे भरे हुए कलश रखे हैं और वे फूल, दीपक, नयी-नयी कोंपलें फलसहित केले और सुपारीके वृक्ष, छोटी-छोटी झंडियों और रेशमी वस्त्रोंसे भलीभाँति सजाए हुए हैं॥ २३॥