श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.41.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 41 · अथैकचत्वारिंशोऽध्यायः

तमपृच्छद‍्धृषीकेशः किं ते दृष्टमिवाद्भुतम्।

भूमौ वियति तोये वा तथा त्वां लक्षयामहे॥ ३

tamapṛcchaddhṛṣīkeśaḥ kiṃ te dṛṣṭamivādbhutam|

bhūmau viyati toye vā tathā tvāṃ lakṣayāmahe|| 3

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने उनसे पूछा—‘चाचाजी! आपने पृथ्वी, आकाश या जलमें कोई अद्भुत वस्तु देखी है क्या? क्योंकि आपकी आकृति देखनेसे ऐसा ही जान पड़ता है’॥ ३॥

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