श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.41.33

दशम स्कन्ध · अध्याय 41 · अथैकचत्वारिंशोऽध्यायः

देह्यावयोः समुचितान्यंग वासांसि चार्हतोः।

भविष्यति परं श्रेयो दातुस्ते नात्र संशयः॥ ३३

dehyāvayoḥ samucitānyaṃga vāsāṃsi cārhatoḥ|

bhaviṣyati paraṃ śreyo dātuste nātra saṃśayaḥ|| 33

अर्थ

भगवान्‌ने कहा—‘भाई! तुम हमें ऐसे वस्त्र दो, जो हमारे शरीरमें पूरे-पूरे आ जायँ। वास्तवमें हमलोग उन वस्त्रोंके अधिकारी हैं। इसमें सन्देह नहीं कि यदि तुम हमलोगोंको वस्त्र दोगे तो तुम्हारा परम कल्याण होगा’॥ ३३॥

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