श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.41.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 41 · अथैकचत्वारिंशोऽध्यायः

वसित्वाऽऽत्मप्रिये वस्त्रे कृष्णः संकर्षणस्तथा।

शेषाण्यादत्त गोपेभ्यो विसृज्य भुवि कानिचित्॥ ३९

vasitvā''tmapriye vastre kṛṣṇaḥ saṃkarṣaṇastathā|

śeṣāṇyādatta gopebhyo visṛjya bhuvi kānicit|| 39

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीने मनमाने वस्त्र पहन लिये तथा बचे हुए वस्त्रोंमेंसे बहुत-से अपने साथी ग्वाल-बालोंको भी दिये। बहुत-से कपड़े तो वहीं जमीनपर ही छोड़कर चल दिये॥ ३९॥

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