भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीने मनमाने वस्त्र पहन लिये तथा बचे हुए वस्त्रोंमेंसे बहुत-से अपने साथी ग्वाल-बालोंको भी दिये। बहुत-से कपड़े तो वहीं जमीनपर ही छोड़कर चल दिये॥ ३९॥
वसित्वाऽऽत्मप्रिये वस्त्रे कृष्णः संकर्षणस्तथा।
शेषाण्यादत्त गोपेभ्यो विसृज्य भुवि कानिचित्॥ ३९
भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीने मनमाने वस्त्र पहन लिये तथा बचे हुए वस्त्रोंमेंसे बहुत-से अपने साथी ग्वाल-बालोंको भी दिये। बहुत-से कपड़े तो वहीं जमीनपर ही छोड़कर चल दिये॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.41.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 391) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/41/39/