॥ श्रीहरिः ॥
तस्यानुजीविनः सर्वे वा१सः कोशान् विसृज्य वै।
दुद्रुवुः सर्वतो मार्गं वासांसि जगृहेऽच्युतः॥ ३८
tasyānujīvinaḥ sarve vāsaḥ kośān visṛjya vai|
dudruvuḥ sarvato mārgaṃ vāsāṃsi jagṛhe'cyutaḥ|| 38
अर्थ
यह देखकर उस धोबीके अधीन काम करनेवाले सब-के-सब कपड़ोंके गट्ठर वहीं छोड़कर इधर-उधर भाग गये। भगवान्ने उन वस्त्रोंको ले लिया॥ ३८॥
तस्यानुजीविनः सर्वे वासः कोशान् विसृज्य वै।
दुद्रुवुः सर्वतो मार्गं वासांसि जगृहेऽच्युतः॥ ३८
यह देखकर उस धोबीके अधीन काम करनेवाले सब-के-सब कपड़ोंके गट्ठर वहीं छोड़कर इधर-उधर भाग गये। भगवान्ने उन वस्त्रोंको ले लिया॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.41.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 390) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/41/38/टिप्पणियाँ
- १
बाह्यघोषैर्वितत्रसुः।
(मुद्रित पृष्ठ 390)