श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.41.42

दशम स्कन्ध · अध्याय 41 · अथैकचत्वारिंशोऽध्यायः

तस्य प्रसन्‍नो भगवान् प्रादात् सारूप्यमात्मनः।

श्रियं च परमां लोके बलैश्‍वर्यस्मृतीन्द्रियम्॥ ४२

tasya prasanno bhagavān prādāt sārūpyamātmanaḥ|

śriyaṃ ca paramāṃ loke balaiśvaryasmṛtīndriyam|| 42

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्ण उस दर्जीपर बहुत प्रसन्‍न हुए। उन्होंने उसे इस लोकमें भरपूर धन-सम्पत्ति, बल-ऐश्‍वर्य, अपनी स्मृति और दूरतक देखने-सुनने आदिकी इन्द्रियसम्बन्धी शक्तियाँ दीं और मृत्युके बादके लिये अपना सारूप्य मोक्ष भी दे दिया॥ ४२॥

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