इसके बाद भगवान् श्रीकृष्ण सुदामा मालीके घर गये। दोनों भाइयोंको देखते ही सुदामा उठ खड़ा हुआ और पृथ्वीपर सिर रखकर उन्हें प्रणाम किया॥ ४३॥
ततः सुदाम्नो भवनं मालाकारस्य जग्मतुः।
तौ दृष्ट्वा स समुत्थाय ननाम शिरसा भुवि॥ ४३
इसके बाद भगवान् श्रीकृष्ण सुदामा मालीके घर गये। दोनों भाइयोंको देखते ही सुदामा उठ खड़ा हुआ और पृथ्वीपर सिर रखकर उन्हें प्रणाम किया॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.41.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 391) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/41/43/