prāha naḥ sārthakaṃ janma pāvitaṃ ca kulaṃ prabho|
pitṛdevarṣayo mahyaṃ tuṣṭā hyāgamanena vām|| 45
अर्थ
इसके पश्चात् उसने प्रार्थना की—‘प्रभो! आप दोनोंके शुभागमनसे हमारा जन्म सफल हो गया। हमारा कुल पवित्र हो गया। आज हम पितर, ऋषि और देवताओंके ऋणसे मुक्त हो गये। वे हमपर परम सन्तुष्ट हैं॥ ४५॥
प्राह नः सार्थकं जन्म पावितं च कुलं प्रभो।
पितृदेवर्षयो मह्यं तुष्टा ह्यागमनेन वाम्॥ ४५
इसके पश्चात् उसने प्रार्थना की—‘प्रभो! आप दोनोंके शुभागमनसे हमारा जन्म सफल हो गया। हमारा कुल पवित्र हो गया। आज हम पितर, ऋषि और देवताओंके ऋणसे मुक्त हो गये। वे हमपर परम सन्तुष्ट हैं॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.41.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 391) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/41/45/