श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.41.46

दशम स्कन्ध · अध्याय 41 · अथैकचत्वारिंशोऽध्यायः

भवन्तौ किल विश्‍वस्य जगतः कारणं परम्।

अवतीर्णाविहांशेन क्षेमाय च भवाय च॥ ४६

bhavantau kila viśvasya jagataḥ kāraṇaṃ param|

avatīrṇāvihāṃśena kṣemāya ca bhavāya ca|| 46

अर्थ

आप दोनों सम्पूर्ण जगत‍्के परम कारण हैं। आप संसारके अभ्युदय-उन्‍नति और निःश्रेयस—मोक्षके लिये ही इस पृथ्वीपर अपने ज्ञान, बल आदि अंशोंके साथ अवतीर्ण हुए हैं॥ ४६॥

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