राजेन्द्र! सुदामा मालीने इस प्रकार प्रार्थना करनेके बाद भगवान्का अभिप्राय जानकर बड़े प्रेम और आनन्दसे भरकर अत्यन्त सुन्दर-सुन्दर तथा सुगन्धित पुष्पोंसे गुँथे हुए हार उन्हें पहनाये॥ ४९॥
इत्यभिप्रेत्य राजेन्द्र सुदामा प्रीतमानसः।
शस्तैः सुगन्धैः कुसुमैर्माला विरचिता ददौ॥ ४९
राजेन्द्र! सुदामा मालीने इस प्रकार प्रार्थना करनेके बाद भगवान्का अभिप्राय जानकर बड़े प्रेम और आनन्दसे भरकर अत्यन्त सुन्दर-सुन्दर तथा सुगन्धित पुष्पोंसे गुँथे हुए हार उन्हें पहनाये॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.41.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 392) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/41/49/