श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.41.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 41 · अथैकचत्वारिंशोऽध्यायः

तान् समेत्याह भगवानक्रूरं जगदीश्‍वरः।

गृहीत्वा पाणिना पाणिं प्रश्रितं प्रहसन्‍निव॥ ९

tān sametyāha bhagavānakrūraṃ jagadīśvaraḥ|

gṛhītvā pāṇinā pāṇiṃ praśritaṃ prahasanniva|| 9

अर्थ

उनके पास पहुँचकर जगदीश्‍वर भगवान् श्रीकृष्णने विनीतभावसे खड़े अक्रूरजीका हाथ अपने हाथमें लेकर मुसकराते हुए कहा—॥ ९॥

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