॥ श्रीहरिः ॥
तान् समेत्याह भगवानक्रूरं जगदीश्वरः।
गृहीत्वा पाणिना पाणिं प्रश्रितं प्रहसन्निव॥ ९
tān sametyāha bhagavānakrūraṃ jagadīśvaraḥ|
gṛhītvā pāṇinā pāṇiṃ praśritaṃ prahasanniva|| 9
अर्थ
उनके पास पहुँचकर जगदीश्वर भगवान् श्रीकृष्णने विनीतभावसे खड़े अक्रूरजीका हाथ अपने हाथमें लेकर मुसकराते हुए कहा—॥ ९॥
तान् समेत्याह भगवानक्रूरं जगदीश्वरः।
गृहीत्वा पाणिना पाणिं प्रश्रितं प्रहसन्निव॥ ९
उनके पास पहुँचकर जगदीश्वर भगवान् श्रीकृष्णने विनीतभावसे खड़े अक्रूरजीका हाथ अपने हाथमें लेकर मुसकराते हुए कहा—॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.41.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 387) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/41/9/