उस धनुषमें बहुत-सा धन लगाया गया था, अनेक बहुमूल्य अलंकारोंसे उसे सजाया गया था। उसकी खूब पूजा की गयी थी और बहुत-से सैनिक उसकी रक्षा कर रहे थे। भगवान् श्रीकृष्णने रक्षकोंके रोकनेपर भी उस धनुषको बलात् उठा लिया॥ १६॥
पुरुषैर्बहुभिर्गुप्तमर्चितं परमर्द्धिमत्।
वार्यमाणो नृभिः कृष्णः प्रसह्य धनुराददे॥ १६
उस धनुषमें बहुत-सा धन लगाया गया था, अनेक बहुमूल्य अलंकारोंसे उसे सजाया गया था। उसकी खूब पूजा की गयी थी और बहुत-से सैनिक उसकी रक्षा कर रहे थे। भगवान् श्रीकृष्णने रक्षकोंके रोकनेपर भी उस धनुषको बलात् उठा लिया॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.42.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 394) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/42/16/