॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.42.33
आनर्चुः पुरुषा रंगं तूर्यभेर्यश्च जघ्निरे।
मंचाश्चालंकृताः स्रग्भिः पताकाचैलतोरणैः॥ ३३
ānarcuḥ puruṣā raṃgaṃ tūryabheryaśca jaghnire|
maṃcāścālaṃkṛtāḥ sragbhiḥ patākācailatoraṇaiḥ|| 33
अर्थ
राजकर्मचारियोंने रंगभूमिको भलीभाँति सजाया। तुरही, भेरी आदि बाजे बजने लगे। लोगोंके बैठनेके मंच फूलोंके गजरों, झंडियों, वस्त्र और बंदनवारोंसे सजा दिये गये॥ ३३॥