तब भगवान् श्रीकृष्णने अपने साँवले शरीरपर पीले रंगका और बलरामजीने अपने गोरे शरीरपर लाल रंगका अंगराग लगाया तथा नाभिसे ऊपरके भागमें अनुरंजित होकर वे अत्यन्त सुशोभित हुए॥ ५॥
ततस्तावङ्गरागेण स्ववर्णेतरशोभिना।
सम्प्राप्तपरभागेन शुशुभातेऽनुरञ्जितौ॥ ५
तब भगवान् श्रीकृष्णने अपने साँवले शरीरपर पीले रंगका और बलरामजीने अपने गोरे शरीरपर लाल रंगका अंगराग लगाया तथा नाभिसे ऊपरके भागमें अनुरंजित होकर वे अत्यन्त सुशोभित हुए॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.42.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 393) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/42/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1169 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): शुशुभातेऽनुरंञ्जितौ॥ → शुशुभातेऽनुरञ्जितौ॥