जब कुवलयापीडका यह आक्रमण व्यर्थ हो गया, तब वह और भी चिढ़ गया। महावतोंकी प्रेरणासे वह क्रुद्ध होकर भगवान् श्रीकृष्णपर टूट पड़ा॥ १२॥
स्वविक्रमे प्रतिहते कुंजरेन्द्रोऽत्यमर्षितः।
चोद्यमानो महामात्रैः कृष्णमभ्यद्रवद् रुषा॥ १२
जब कुवलयापीडका यह आक्रमण व्यर्थ हो गया, तब वह और भी चिढ़ गया। महावतोंकी प्रेरणासे वह क्रुद्ध होकर भगवान् श्रीकृष्णपर टूट पड़ा॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.43.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 398) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/43/12/